Scope of this discussion: To share your dreams, the ones you would like to pursue and which will be greatly facilitated post AK
Initial comments: As Arthakranti removes systemic obstacles, individuals would get even more empowered to follow their own pathways of progress and prosperity. So if you would like, you are most welcome to share with us about your dreams, those you would like to pursue and how do you think those would be facilitated post AK implementation.
Which dreams you would be happy to pursue, post Arthakranti proposal implementation?
Submitted by bhushanpa on Wed, 12/15/2010 - 13:31
Real Democrecy
सभी सांसद आज वास्तव में जन प्रतिनिधि तो हैं किन्तु किसी भी लोक सभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं का मात्र १५% वोट पाकर भी आज सांसद विधायक बन जाता है ,इसके लिए भी “अनिवार्य वोटिंग ” का नियम बने ,तब कहीं जाकर कुछ सुधर संभव है ,ये सच है की देश में लोकतंत्र अब दुनिया के लिए मिसाल बन गया किन्तु परदे के अन्दर और बाहर वोटो का जो खेल होता है वो कहीं ना कहीं दीमक का काम कर रहा है ,अल्प मतों से जीत के बाद सांसद विधायकों से बनी सरकारें भी अब तो जोड़तोड़ का प्रतिनिधित्व,गढ़बंधन धर्म निभाने की बातें कर सिध्धान्तों की बलि चढ़ा रहीं हैं ,वर्तमान में केवल गुजरात की सरकार ही एक ऐसी सरकार है जिसने ५०% से ज्यादा वोट पाकर सरकार बनाई है ये एक दृष्टिकोण है की सभी नेता भ्रस्ट नहीं होते सभी नेता नेता नहीं होते सभी सांसद विधायक सही जन प्रतिनिधि नहीं होते ,सभी सरकारें ५०% से जयादा वोट पाने वाली नहीं होतीं ,इस लिए केवल एक आन्दोलन से घबराना नहीं चाहिए बल्कि सहज रूप से इस बात को मान लेना चाहिए की देश की ९५% जनता अब भ्रस्टाचार से दुखी हो गई है ,वो अब आश्वासन नहीं समाधान चाहती है ,ये चाहत किसी वर्ग विशेष की नहीं बल्कि देश के हर आम और ख़ास की शसक्त और बुलंद आवाज़ है,जो किसी भी प्रकार के ढोल नगाडो या शोर गुल तले दबाने या दबने वाली नहीं हैं .
लोकतंत्र इस देश की साख है ,दुनिया में हम सबसे बड़े प्रजातान्त्रिक देश के रूप में जाने जाते हैं ,समय के साथ साथ ६१ वर्षों में संविधान में अनेकों बार संसोधन किये गए ,अब वर्त्तमान परिस्थितियों में दो महत्वपूर्ण संसोधन अपेक्षित है -
(१) अनिवार्य वोटिंग -देश के सभी मतदाताओं को अनिवार्य वोटिंग के लिए नियम बनाए जा सकते हैं ,जैसे वोटिंग कार्ड -वोट देने वाले मतदाता के कार्ड पर अंक देकर उसे प्रेरित किया जा सकता है .जिससे साबित होगा की मतदाता केवल कहने के लिए या पहचान भर के लिए वोटर नहीं है बल्कि इसने वास्तव में मतदान भी किया है .
(२) किसी भी दशा में जीतने वाले प्रत्याशी को ५०% से ज्यादा वोट प्राप्त करने ही होंगें ,अन्यथा फिर से मतदान कराया जाएगा ,जीत के लिए ५०% से ज्यादा वोट प्राप्त क़रने की अनिवार्यता के कारण जनता को अपना सही जन प्रतिनिधि भी मिलेगा और साथ ही साथ चुनाव और नेता को लेकर उठाये जाने वाले अनेक संदेह भी बंद हो जायेंगें ,हो सकता है की प्रारंभ में हमें थोडा कठिन परिश्रम करना पड़े किन्तु वास्तव में ये जब होने लग जाएगा तो एक परिपक्व प्रजातंत्र हमारी पहचान अलग ढंग से बनाएगा .
इस प्रकार से जब जनप्रतिनिधि चुने जायेंगें तो लोकपाल विधेयक के साथ ही साथ हम उम्मीद कर संकेगें की जनता -नेता -प्रशासन-शासन सब कुछ ठीक हो सकेगा ,या उम्मीद की कुछ किरणे ज़रूर प्रज्वलित होंगीं